शतचंडी महायज्ञ सनातन धर्म में शक्ति उपासना का सबसे शक्तिशाली और फलदायी अनुष्ठान माना जाता है। यह माँ दुर्गा (शक्ति) को प्रसन्न करने के लिए किया जाने वाला एक अत्यंत विस्तृत यज्ञ है।
यह यज्ञ श्री दुर्गा सप्तशती के 100 पाठों (शत = 100) के साथ संपन्न होता है। इसमें माँ चंडी के स्वरूप की आराधना की जाती है। यह एक सामूहिक अनुष्ठान है जिसमें मंत्रों की शक्ति, आहुति और श्रद्धा का संगम होता है।
यह यज्ञ किसी भी शुभ मुहूर्त में किया जा सकता है, लेकिन निम्नलिखित समय सर्वोत्तम माने जाते हैं:
नवरात्रि (चैत्र और शारदीय) के दौरान।
देवी के विशेष पर्वों पर।
किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति या भारी संकट के निवारण हेतु।
इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह 'असंभव को संभव' बनाने की शक्ति रखता है। यह नकारात्मक ऊर्जा, शत्रुओं और ग्रहों के अशुभ प्रभाव को पूरी तरह नष्ट कर देता है। इसमें ब्रह्मांड की सर्वोच्च शक्ति 'माँ दुर्गा' का आह्वान किया जाता है।
मुख्य देवी: माँ दुर्गा (चंडी रूप में)।
अन्य देवता: भगवान गणेश (प्रथम पूज्य), नवग्रह, षोडश मातृका, क्षेत्रपाल, और भगवान शिव।
शास्त्रों के अनुसार, इस यज्ञ में विभिन्न वेदियों का निर्माण होता है, जिनमें मुख्य हैं:
प्रधान वेदी: जहाँ माँ चंडी की स्थापना होती है।
योगिनी वेदी: 64 योगिनियों के लिए।
क्षेत्रपाल वेदी: रक्षा हेतु।
नवग्रह वेदी: ग्रहों की शांति के लिए।
सर्वतोभद्र मण्डल: समस्त देवताओं के आह्वान के लिए।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस अनुष्ठान की जड़ें सतयुग में हैं। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, राजा सुरथ और वैश्य समाधि ने महर्षि मेधा के परामर्श पर सबसे पहले देवी की आराधना की थी, जिससे उन्हें अपना खोया हुआ राज्य और ज्ञान प्राप्त हुआ था।
शास्त्रों के अनुसार, शतचंडी महायज्ञ के लिए आमतौर पर 9 विद्वान ब्राह्मणों की आवश्यकता होती है। प्रत्येक ब्राह्मण सप्तशती का पाठ और जप करता है ताकि कुल संख्या 100 (शत) तक पहुँच सके।
इसका विस्तृत वर्णन मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत आने वाले 'देवी महात्म्य' (दुर्गा सप्तशती) में मिलता है। इसके अतिरिक्त देवी भागवत पुराण में भी इसकी महिमा बताई गई है।
शत्रुओं और कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय।
असाध्य रोगों से मुक्ति और दीर्घायु।
व्यापार में उन्नति और धन-धान्य की प्राप्ति।
ग्रह दोष (विशेषकर राहु-केतु और शनि) का निवारण।
घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार।
यह यज्ञ आमतौर पर 7 दिनों तक चलता है। पाठों की संख्या और यजमान की शक्ति के अनुसार इसे 5 दिन में भी संपन्न किया जा सकता है |
कैवल्य एस्ट्रो (Kaivalya Astro) ऐप के जरिए आप घर बैठे इस भव्य यज्ञ का आयोजन करवा सकते हैं:
ऐप डाउनलोड करें: सबसे पहले Play Store या App Store से Kaivalya Astro ऐप इंस्टॉल करें।
पूजा अनुभाग (Puja Section): ऐप के मेन्यू में 'dharmik aayojan' या 'E-Puja' विकल्प पर जाएं।
यज्ञ का चयन: उपलब्ध सूची में से 'Shatchandi Mahayagya' को चुनें।
विवरण भरें: अपना नाम, गोत्र, स्थान और संकल्प का उद्देश्य दर्ज करें।
भुगतान और स्लॉट: शुभ मुहूर्त के अनुसार समय बुक करें और ऑनलाइन भुगतान पूरा करें।
नोट: आप लाइव वीडियो कॉल के जरिए भी अपने यज्ञ में सम्मिलित हो सकते हैं।
शतचंडी महायज्ञ अनुष्ठान सेवा राशि 1,51,000 है
The service amount for Shatchandi Mahayagna ritual is Rs 1,51,000.
अपने क्षेत्र विशेष में करवाने पर ब्राह्मणों के आने जाने का मार्ग व्यय अलग से देना होगा और पूजा सामग्री स्वयं से लानी होगी
If the puja is organised in your particular area, you will have to pay the travel expenses of the Brahmins separately and will have to
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