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कच्छप यंत्र आसन (Kachhap Yantra Asan) को समझने के लिए इसे दो अलग-अलग संदर्भों में देखना आवश्यक है: एक प्राचीन रसशास्त्र (आयुर्वेद) के संदर्भ में और दूसरा आध्यात्मिक/वास्तु के संदर्भ में।
रसशास्त्र (आयुर्वेद) के संदर्भ में: यह प्राचीन भारतीय रसायन शास्त्र (Alchemy) का एक विशेष उपकरण है। "कच्छप" का अर्थ है 'कछुआ'। यह एक मिट्टी का बड़ा पात्र (मिट्टी का बर्तन) होता है, जो पानी पर तैरता रहता है। इसका उपयोग पारे (Mercury) को गर्म करने और धातुओं को शुद्ध या भस्म करने की जटिल वैज्ञानिक प्रक्रियाओं (जैसे 'जारण') में किया जाता था।
आध्यात्मिक/वास्तु के संदर्भ में: यहाँ 'कच्छप' का अर्थ है कछुआ और 'यंत्र' का अर्थ है एक ज्यामितीय आकृति (जैसे श्री यंत्र)। इसे 'कच्छप श्री यंत्र' भी कहा जाता है। यह श्री यंत्र की वह अवस्था है जहाँ यंत्र को कछुए की पीठ पर स्थापित किया जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं में, कछुए को भगवान विष्णु का 'कूर्म अवतार' माना जाता है, जो पृथ्वी का भार अपनी पीठ पर धारण करते हैं।
रसशास्त्र का कच्छप यंत्र: यह मुख्य रूप से मिट्टी से बना एक बड़ा पात्र होता है। इसे एक अन्य बड़े पात्र (जिसमें पानी भरा हो) पर तैराया जाता है। इसके अंदर पारे और अन्य औषधियों का मिश्रण रखा जाता है और फिर इसे लोहे की प्लेट से सील करके ऊपर से नियंत्रित अग्नि (कोयले की आग) दी जाती है।
आध्यात्मिक/वास्तु का कच्छप श्री यंत्र:
सामग्री: यह मुख्य रूप से पीतल (Brass), तांबा (Copper) या चांदी (Silver) से बना होता है।
बनावट: इसमें आधार के रूप में एक धातु का कछुआ होता है, जिसकी पीठ पर उभरे हुए या नक्काशीदार श्री यंत्र की प्लेट टिकी होती है। यह यंत्र अत्यंत बारीक रेखाओं और ज्यामितीय त्रिकोणों से बना होता है।
रसशास्त्र में लाभ: इसका उपयोग पारे को विशेष गुणों वाला बनाने के लिए किया जाता था, ताकि उसे औषधीय रूप में उपयोग किया जा सके या धातुओं को स्वर्ण में परिवर्तित करने (प्राचीन दंतकथाओं के अनुसार) की प्रक्रिया में उपयोग किया जा सके।
आध्यात्मिक और वास्तु लाभ (कच्छप श्री यंत्र):
वास्तु दोष का निवारण: कछुआ वास्तु में स्थिरता और लंबी आयु का प्रतीक है। इसे घर या कार्यालय में रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और वास्तु दोषों का शमन होता है।
आर्थिक समृद्धि: श्री यंत्र को 'धन का देवता' माना जाता है। कछुए की पीठ पर श्री यंत्र होने से इसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है, जो धन-धान्य और सुख-समृद्धि को आकर्षित करती है।
स्थिरता और शांति: कछुआ धीरे-धीरे लेकिन अडिग गति से चलता है, जो जीवन में धैर्य, स्थिरता और मानसिक शांति प्रदान करता है।
सुरक्षा: इसे नकारात्मक शक्तियों, बुरी नजर और दुर्भाग्य से सुरक्षा प्रदान करने वाला यंत्र माना जाता है।
एक महत्वपूर्ण सुझाव: यदि आप इसे अपने घर या कार्यालय में स्थापित करना चाहते हैं, तो इसे उत्तर दिशा या पूजा स्थल में रखना सबसे शुभ माना जाता है। इसे रखने से पहले इसे गंगाजल या कच्चे दूध से शुद्ध करना चाहिए।
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