Peeli Kaudi Big Size | Yellow Cowrie Shells for Lakshmi Puja, Tantra Puja & Spiritual Rituals
पीली कौड़ी (Yellow Cowrie Shell) भारतीय ज्योतिष और तंत्र शास्त्र में एक अत्यंत प्रभावशाली और शुभ वस्तु मानी जाती है। इसे धन, सौभाग्य और सुरक्षा का प्रतीक माना गया है।
पीली कौड़ी एक समुद्री जीव का खोल (shell) है। पुराने समय में, भारत में कौड़ियों का उपयोग मुद्रा (currency) के रूप में किया जाता था। विशेष रूप से पीली कौड़ी को माता लक्ष्मी का प्रिय माना जाता है क्योंकि इसका रंग और बनावट सोने और धन की समृद्धि की याद दिलाते हैं। ज्योतिष में इसे 'धनवर्धक' उपाय माना गया है।
पीली कौड़ी मानव-निर्मित नहीं है, बल्कि यह पूर्णतः प्राकृतिक है:
प्राकृतिक स्रोत: यह एक प्रकार के समुद्री घोंघे (समुद्री जीव) का बाहरी कवच है, जिसे वैज्ञानिक रूप से Cypraeidae परिवार के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है।
निर्माण प्रक्रिया: यह जीव समुद्र की तलहटी में रहता है और अपने शरीर से कैल्शियम कार्बोनेट स्रावित करके अपना कवच बनाता है। जब वह जीव मर जाता है, तो यह खाली कठोर खोल (कौड़ी) समुद्र के किनारे लहरों के साथ बहकर आ जाती है।
चयन: इन प्राकृतिक कौड़ियों को इकट्ठा किया जाता है। इनमें से जो प्राकृतिक रूप से सुनहरी या पीली आभा वाली होती हैं, उन्हें विशेष रूप से चुनकर निकाला जाता है।
तंत्र शास्त्र और वास्तु शास्त्र में पीली कौड़ी के निम्नलिखित लाभ बताए गए हैं:
धन की वृद्धि: इसे माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। यदि 11 या 21 पीली कौड़ियों को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखा जाए, तो यह धन को आकर्षित करती हैं और फिजूलखर्ची कम करती हैं।
वास्तु दोष निवारण: घर के मुख्य द्वार पर या घर के कोनों में पीली कौड़ी रखने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश रुक जाता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
आर्थिक बाधाओं का अंत: व्यापारिक स्थल या ऑफिस में इन्हें रखने से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है।
नजर दोष से सुरक्षा: बच्चों या व्यापार को बुरी नजर से बचाने के लिए पीली कौड़ी को ताबीज के रूप में या धागे में पिरोकर लटकाया जाता है।
ग्रह दोष शांति: ज्योतिष में इसे धन के कारक ग्रह 'शुक्र' से जोड़ा जाता है। शुक्र ग्रह की शांति और आर्थिक लाभ के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।
शुद्धिकरण: बाजार से लाने के बाद पीली कौड़ी को सीधे इस्तेमाल न करें। पहले इसे गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध करें, फिर एक लाल कपड़े पर रखकर अक्षत और कुमकुम से पूजा करें।
स्थान: इसे हमेशा स्वच्छ और पवित्र स्थान पर रखें। तिजोरी, पूजा घर या कार्यस्थल इसके लिए सर्वोत्तम स्थान हैं।
संख्या: शास्त्रों में इसे हमेशा विषम संख्या (Odd Numbers) जैसे 1, 5, 7, 11, या 21 की संख्या में रखना अधिक शुभ माना गया है।
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