व्रत कथा की सेवा राशि 1500 है
The service amount for the Vrat Katha is Rs 1500.
अपने घर पर करवाने पर आने जाने का व्यय अलग से देना होगा और सामग्री स्वयं से लानी होगी
If you get it done at your home, you will have to pay for the travel expenses separately and bring the materials yourself.
प्रदोष व्रत हिंदू धर्म के सबसे कल्याणकारी व्रतों में से एक माना जाता है। इसे 'त्रयोदशी व्रत' के नाम से भी जाना जाता है। भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए यह व्रत रामबाण माना गया है।
तिथि: यह व्रत प्रत्येक माह की त्रयोदशी (तेरस) तिथि को रखा जाता है।
माह: यह हिंदू कैलेंडर के हर महीने में दो बार आता है—एक बार शुक्ल पक्ष में और एक बार कृष्ण पक्ष में।
प्रदोष काल: सूर्यास्त के बाद और रात्रि के आगमन से पहले के समय को 'प्रदोष काल' कहा जाता है। इसी समय पूजन का विधान है।
प्रदोष व्रत का प्रचलन संपूर्ण भारत में है। विशेषकर उत्तर भारत (UP, MP, राजस्थान) और दक्षिण भारत (जहाँ इसे 'प्रदोषम' कहा जाता है) में इसकी अत्यधिक मान्यता है। दक्षिण भारत के शिव मंदिरों में इस दिन विशेष उत्सव मनाया जाता है।
मुख्य देव: इस व्रत में भगवान शिव (महादेव) का पूजन किया जाता है। साथ ही माता पार्वती और नंदी का भी ध्यान किया जाता है।
कामना: यह व्रत संतान प्राप्ति, रोग मुक्ति, कर्ज से छुटकारा और मानसिक शांति की कामना से किया जाता है।
प्रदोष व्रत के कुछ कड़े और महत्वपूर्ण नियम हैं:
स्नान और शुद्धता: सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। शाम को सूर्यास्त से पहले दोबारा स्नान कर स्वच्छ (संभव हो तो सफेद) वस्त्र धारण करें।
भोजन: यह व्रत निराहार या फलाहार रखा जाता है। इसमें नमक का सेवन वर्जित माना गया है।
पूजन समय: पूजन हमेशा प्रदोष काल (सूर्यास्त के लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद तक) में ही करना चाहिए।
सामग्री: शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत (चावल) अर्पित किए जाते हैं।
प्रदोष जिस दिन पड़ता है, उसके अनुसार फल बदल जाता है:
| सोमवार | सोम प्रदोष | आरोग्य और मानसिक शांति |
| मंगलवार | भौम प्रदोष | कर्ज से मुक्ति और मंगल दोष शांति |
| शनिवार | शनि प्रदोष | संतान सुख और पदोन्नति |
| रविवार | भानु प्रदोष | लंबी आयु और यश की प्राप्ति |
प्रारम्भ: पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया, तो सबसे पहले 'विष' निकला। सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण किया। जिस समय उन्होंने विषपान किया, वह त्रयोदशी की संध्या थी। देवताओं ने उनकी स्तुति की और शिव जी प्रसन्न हुए। तभी से प्रदोष व्रत का आरंभ माना जाता है।
शास्त्र: प्रदोष व्रत का विस्तारपूर्वक वर्णन स्कंद पुराण और शिव पुराण में मिलता है। वेदों में भगवान रुद्र की उपासना का जो महत्व है, वही महत्व पुराणों में प्रदोष व्रत को दिया गया है।
Kaivalya Astro ऐप प्रदोष व्रत के अनुष्ठान को सरल और फलदायी बनाने में आपकी पूरी सहायता करता है:
विद्वान ब्राह्मणों द्वारा संकल्प: यदि आप स्वयं पूजा करने में असमर्थ हैं, तो ऐप के माध्यम से काशी के विद्वान पंडितों से अपने नाम और गोत्र के साथ रुद्राभिषेक या प्रदोष पूजन का संकल्प करवा सकते हैं।
लाइव दर्शन और कथा: प्रदोष के दिन ऐप पर लाइव सत्रों के माध्यम से आप प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा (जो वार के अनुसार अलग होती है) सुन सकते हैं।
सटीक मुहूर्त: प्रत्येक महीने त्रयोदशी तिथि कब शुरू हो रही है और 'प्रदोष काल' का सबसे सटीक समय क्या है, यह जानकारी आपको ऐप के पंचांग सेक्शन में मिल जाएगी।
उपाय और परामर्श: यदि आप कर्ज या स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए व्रत कर रहे हैं, तो ऐप के ज्योतिषी आपको वार के अनुसार विशेष मंत्रों का सुझाव दे सकते हैं।
विशेष नोट: स्कंद पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति प्रदोष के समय शिव मंदिर की चौखट पर दीप दान करता है, उसके जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं।
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नो रिफंड पॉलिसी (No Refund Policy): एक बार किसी भी सेवा, साधना या सामग्री के लिए दी गई सेवा राशि/शुल्क किसी भी स्थिति में वापस (Refund) नहीं की जाएगी।
(नोट: आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन करने से पहले अपनी स्थिति के अनुसार योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।)
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