पारंपरिक एवं लोक-साहित्यिक मान्यताओं पर आधारित, मछली पकड़ने के निमित्त उपयोग में लाया जाने वाला सिद्ध शाबर/काली मंत्र और उसकी पंक्तियाँ:
"श्मशान की माटी तेरा धर्म की दाय।
जल में फेंके जलकुमारी उंगली हिलाए॥
जो जहाँ रहे मछली आन, दे बुला कर।
माटा फेंकी माटीश्वर आश्रय बैठा बिसिया॥
यह माटी गढ़ी करी मछली धरिबार।
यथाय रहिस मछली शिघ्रिर आसे धर॥
यह आज्ञा यदि लड़े, जलदेवता वरुण की जटा खसी पड़े।
किसकी आज्ञा? शिव की आज्ञा। जलदेवता वरुण की आज्ञा॥"
लोक-मान्यता:- इस प्राचीन शाबर मंत्र का उल्लेख पारंपरिक लोक-विद्याओं में जलचरों (मछलियों) को आकर्षित करने तथा कार्य-सिद्धि के लिए श्मशान की माटी व जलदेवता के आह्वान के रूप में मिलता है।
भाव एवं निष्ठा:- पारंपरिक रीति में इसे एकाग्रता, स्पष्ट उच्चारण और गुरु-परंपरा के नियमों के अनुसार ही पढ़ा जाता है।
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