Gomti Chakra Safed – Sacred White Shell for Pooja, Havan & Spiritual Use | Powerful Religious Item for Mandir, Lakshmi Puja & Vastu Shanti | Auspicious Devotional Chakra
गोमती चक्र (Gomti Chakra) भारतीय तंत्र शास्त्र, वास्तु शास्त्र और ज्योतिष में एक अत्यंत रहस्यमयी और शक्तिशाली वस्तु मानी जाती है। इसे माता लक्ष्मी का प्रिय माना गया है।
'गोमती चक्र' एक दुर्लभ प्राकृतिक पत्थर है, जो गोमती नदी (द्वारका, गुजरात) में पाया जाता है। यह एक छोटे से चक्र के समान दिखता है, जिसके एक तरफ उभरी हुई आकृति और दूसरी तरफ सर्पिल (Spiral) आकार होता है। इसे 'सुदर्शन चक्र' का लघु स्वरूप माना जाता है। सफेद रंग के गोमती चक्र को सर्वाधिक शुद्ध और सात्विक माना जाता है, जिसका उपयोग धन वृद्धि और सुरक्षा के लिए किया जाता है।
गोमती चक्र किसी मानवीय निर्माण या कारखाने की वस्तु नहीं है, बल्कि यह पूर्णतः प्राकृतिक (Natural) है:
प्राकृतिक स्रोत: यह एक प्रकार के समुद्री घोंघे या सीप (Sea Snail Shell) का अवशेष है। समुद्र की तलहटी में रहने वाला यह जीव जब कालान्तर में मर जाता है, तो उसका कठोर खोल पानी के बहाव के साथ गोमती नदी के तटों पर आकर जमा हो जाता है।
निर्माण प्रक्रिया: यह प्रकृति द्वारा लाखों वर्षों की प्रक्रिया में बनता है। जब यह घोंघा सूख जाता है, तो इसका ऊपरी हिस्सा ही 'गोमती चक्र' के रूप में शेष बचता है। इसमें कैल्शियम कार्बोनेट की अधिकता होती है, जिससे यह बहुत सख्त और पत्थरनुमा दिखता है। इसमें जो चक्र जैसी आकृति दिखाई देती है, वह जीव के शरीर की प्राकृतिक बनावट का हिस्सा होती है।
वास्तु और ज्योतिष शास्त्र में गोमती चक्र के बहुआयामी लाभ बताए गए हैं:
धन की समृद्धि: यदि 11 गोमती चक्रों को पीले कपड़े में लपेटकर तिजोरी में रखा जाए, तो यह धन को आकर्षित करता है और आर्थिक तंगी को दूर करता है।
वास्तु दोष निवारण: घर की नींव में या मुख्य द्वार के ऊपर गोमती चक्र को दबाने या टांगने से घर के वास्तु दोष शांत होते हैं और नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती।
नजर दोष और ऊपरी बाधा: बच्चों या दुकान को बुरी नजर से बचाने के लिए गोमती चक्र को काले धागे में पिरोकर लटकाना अत्यंत प्रभावकारी माना जाता है।
स्वास्थ्य लाभ: माना जाता है कि इसे पास रखने से मानसिक तनाव कम होता है और अनिद्रा जैसी समस्याओं में सुधार होता है।
सफलता और कार्य सिद्धि: किसी भी महत्वपूर्ण कार्य या परीक्षा में जाने से पहले यदि गोमती चक्र के दर्शन किए जाएं, तो सफलता की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
शुद्धिकरण: गोमती चक्र को उपयोग में लाने से पहले इसे गंगाजल या कच्चे दूध से शुद्ध करना अनिवार्य है। इसके बाद इसे लाल या पीले कपड़े पर रखकर देवी लक्ष्मी के मंत्रों से पूजा करनी चाहिए।
संख्या का महत्व: शास्त्रों में इसे हमेशा विषम संख्या (Odd Numbers) में रखने का विधान है। आप इसे 1, 3, 5, 7, 11 या 21 की संख्या में प्रयोग कर सकते हैं।
स्थान: इसे कभी भी जमीन पर न रखें। इसे हमेशा पूजा घर, धन की तिजोरी या किसी ऊंचे और स्वच्छ स्थान पर रखना चाहिए।
विशेष सुझाव: दीपावली और अक्षय तृतीया के दिन गोमती चक्र की पूजा करना विशेष फलदायी होता है। गोमती चक्र को 'लक्ष्मी जी का छोटा रूप' मानकर पूजने से घर में कभी भी अन्न-धन की कमी नहीं होती।
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