Brass Singhasan for God Idol | Peetal Singhasan for Laddu Gopal, Krishna & Home Temple | Decorative Brass God Throne for Pooja Mandir | Traditional Idol Seat for Spiritual Décor
सिंहासन पीतल (Brass Throne/Singhasan) घर के मंदिर में आराध्य देवी-देवताओं को विराजमान करने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक विशेष आसन है। इसे 'विष्णु सिंहासन' के नाम से भी जाना जाता है।
सिंहासन एक ऊँचा आसन होता है, जिस पर भगवान की मूर्तियों या चित्रों को प्रतिष्ठित किया जाता है। हिंदू धर्म में भगवान को 'राजा' माना जाता है, इसलिए उनके बैठने के लिए सिंहासन का होना अत्यंत आवश्यक है। पीतल का सिंहासन न केवल मूर्तियों को एक ऊँचा और सम्मानित स्थान देता है, बल्कि यह मंदिर की शोभा को भी कई गुना बढ़ा देता है।
मूल सामग्री (Base Material): यह शुद्ध पीतल (Brass) से बनाया जाता है, जो तांबे और जस्ते का एक प्राचीन और पवित्र धातु मिश्रण है।
निर्माण प्रक्रिया:
ढलाई (Casting): धातु को गर्म करके सांचे (Mold) में डाला जाता है, जिससे सिंहासन का मुख्य ढांचा तैयार होता है।
नक्काशी (Hand Engraving): सांचे से निकलने के बाद, कारीगर हाथ से इस पर सुंदर डिजाइन, फूल-पत्तियां, या मयूर (Peacock) जैसी आकृतियां उकेरते हैं।
असेंबली (Assembling): सिंहासन के ऊपरी हिस्से (छतरी) और निचले आधार (पैदल) को आपस में जोड़ा जाता है।
फिनिशिंग: अंत में, चमक (Lustre) लाने के लिए इसे पॉलिश किया जाता है। कुछ लोग इसे अधिक आकर्षक बनाने के लिए इस पर 'गोल्ड पॉलिश' या 'एंटीक फिनिश' भी करवाते हैं।
सिंहासन पर भगवान को विराजमान करने के निम्नलिखित धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ हैं:
आदर और सम्मान: शास्त्रों के अनुसार, भगवान को हमेशा ऊंचे आसन पर विराजमान करना चाहिए। इससे भक्त के मन में ईश्वर के प्रति समर्पण और आदर का भाव उत्पन्न होता है।
सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र: पीतल एक ऐसी धातु है जो सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित और संचारित करने में सक्षम है। सिंहासन पर मूर्तियों को रखने से मंदिर का वातावरण अधिक ऊर्जावान और शुद्ध हो जाता है।
वास्तु दोषों का निवारण: घर के मंदिर में पीतल के सिंहासन पर देवता की स्थापना करना वास्तु के अनुसार बहुत शुभ माना जाता है। यह घर में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने में सहायक है।
स्थायित्व (Durability): पीतल के सिंहासन मजबूत और जंग-रोधी होते हैं। यह सदियों तक चलते हैं और आपकी अगली पीढ़ियों के लिए एक विरासत के रूप में सुरक्षित रहते हैं।
आध्यात्मिक भव्यता: एक सुसज्जित सिंहासन भगवान के प्रति हमारे प्रेम और भक्ति का प्रतीक है, जो हमारे पूजा स्थल को एक दिव्य और अलौकिक अनुभव प्रदान करता है।
शुद्धिकरण: नया सिंहासन लाने पर इसे पहले गंगाजल से शुद्ध करें।
सफाई: पीतल के सिंहासन की चमक बनाए रखने के लिए समय-समय पर नींबू, नमक, या 'पीताम्बरी' पाउडर का उपयोग करें। इसे खुरदरी सतह या रसायनों से न रगड़ें।
छतरी का महत्व: अधिकांश पीतल के सिंहासन में ऊपर एक 'छतरी' होती है। मान्यता है कि यह प्रभु को सुरक्षा और शीतलता प्रदान करती है।
स्थान: इसे हमेशा मंदिर के भीतर रखें और इस पर मूर्तियों को उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके स्थापित करें।
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