Brass Shri Yantra Sumeru | Peetal Sri Yantra Meru for Home Temple & Vastu | 3D Shree Yantra Idol for Wealth, Prosperity & Spiritual Energy | Traditional Pooja Yantra for Diwali & Lakshmi Pooja
श्री यंत्र सुमेरु (Shri Yantra Sumeru) को तंत्र शास्त्र में "यंत्रराज" या "यंत्रों का राजा" कहा जाता है। सुमेरु का अर्थ है 'पर्वत के समान' या 'केंद्र बिंदु'। यह साक्षात महालक्ष्मी और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
श्री यंत्र सुमेरु एक त्रि-आयामी (3D) ज्यामितीय रचना है। सामान्य श्री यंत्र अक्सर कागज या तांबे की प्लेट पर अंकित (2D) होते हैं, लेकिन 'सुमेरु' स्वरूप में इसमें पिरामिड जैसी ऊँचाई होती है, जिसका शिखर केंद्र में सबसे ऊपर होता है। यह देवी लक्ष्मी के निवास स्थान 'महानगर' का आध्यात्मिक स्वरूप है। इसमें नौ त्रिकोण (अष्टदल और चतुर्दल) होते हैं जो ब्रह्मांड की उत्पत्ति और विस्तार को दर्शाते हैं।
मूल वस्तु (Source): इसे मुख्य रूप से पीतल (Brass) या अष्टधातु (आठ धातुओं का मिश्रण) से बनाया जाता है। पीतल को ऊर्जा का उत्तम संवाहक (Good Conductor) माना गया है, जो इस यंत्र की सूक्ष्म तरंगों को वातावरण में प्रसारित करने में सक्षम है।
निर्माण प्रक्रिया: * ढलाई (Casting): इसे 'लॉस्ट वैक्स कास्टिंग' या सांचे में ढालने की प्रक्रिया द्वारा बनाया जाता है।
ज्यामितीय सटीकता: सुमेरु यंत्र का निर्माण 'वास्तु' और 'तन्त्र' के गणितीय नियमों के अनुसार होता है। इसके कोण और पिरामिड की ऊँचाई बहुत सटीक होनी चाहिए, तभी यह पूर्ण ऊर्जावान होता है।
पॉलिशिंग और कोटिंग: अंत में इसे चमकदार बनाने के लिए पॉलिश किया जाता है। कई बार इसे अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए इस पर स्वर्ण की परत (Gold Plating) भी चढ़ाई जाती है।
श्री यंत्र सुमेरु के नियमित दर्शन और पूजा से साधक को अतुलनीय लाभ प्राप्त होते हैं:
आर्थिक उन्नति और धन वृद्धि: इसे 'धन आकर्षण का चुंबक' कहा जाता है। घर या ऑफिस में इसकी स्थापना से धन के नए स्रोत खुलते हैं और दरिद्रता का नाश होता है।
सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह: यह यंत्र अपने चारों ओर एक शक्तिशाली सकारात्मक आभा (Aura) बनाता है। जहाँ यह स्थापित होता है, वहाँ कलह, तनाव और नकारात्मक ऊर्जा का स्थान नहीं रहता।
वास्तु दोष निवारण: यह घर के सबसे शक्तिशाली वास्तु सुधारकों में से एक है। यह ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) के दोषों को दूर करने में अत्यंत प्रभावी है।
मानसिक और आध्यात्मिक विकास: इसे केंद्र में रखकर ध्यान (Meditation) करने से मन की एकाग्रता बढ़ती है और अध्यात्म के उच्च सोपान प्राप्त होते हैं।
कार्य सिद्धि: जो लोग जीवन में सफलता, यश और कीर्ति प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए यह यंत्र बहुत ही चमत्कारिक परिणाम देने वाला माना गया है।
स्थापना का स्थान: सुमेरु श्री यंत्र को हमेशा घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या अपने कार्यस्थल के पूजा घर में स्थापित करना चाहिए।
मुखी: इसे स्थापित करते समय इसका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
शुद्धिकरण: इसे प्रथम बार स्थापित करने से पूर्व गंगाजल से शुद्ध करना चाहिए और 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए।
सावधानी: इसे कभी भी टूटी हुई या खंडित अवस्था में नहीं रखना चाहिए। हमेशा सुनिश्चित करें कि यंत्र की ज्यामितीय रेखाएं स्पष्ट और सही बनी हों।
विशेष सुझाव: श्री यंत्र सुमेरु को यदि आप प्रत्येक शुक्रवार को गाय के कच्चे दूध और गंगाजल से स्नान कराकर कुमकुम का तिलक लगाते हैं, तो यह बहुत जल्दी सक्रिय (Energize) हो जाता है और अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर देता है।
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