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आसन बांधने का स्वयं सिद्ध बंगाली मंत्र
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आसन बांधने का स्वयं सिद्ध बंगाली मंत्र: साधना काल में अचूक सुरक्षा कवच

क्या आप साधना के समय एकाग्रता की कमी महसूस करते हैं? या साधना काल में किसी अज्ञात भय या नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव से परेशान हैं? तंत्र शास्त्र और शाबर परंपरा में "आसन बंधन मंत्र" का स्थान सर्वोपरि है। साधना शुरू करने से पहले अपने स्थान को कीलित (सुरक्षित) करना सबसे पहला और अनिवार्य नियम है।

यह बंगाली शाबर मंत्र अपने आप में "स्वयं सिद्ध" है, जो साधना काल में साधक की सुरक्षा, मानसिक एकाग्रता और स्थान की पवित्रता सुनिश्चित करने के लिए अचूक माना जाता है। इसके प्रयोग से कोई भी नकारात्मक ऊर्जा या बाहरी अदृश्य बाधा आपकी साधना में विघ्न नहीं डाल सकती।

🔮 मंत्र का विस्तृत शब्दार्थ एवं दिव्य प्रभाव

बंगाली तंत्र मंत्रों की प्रभावशीलता को गहराई से समझने के लिए इसके शब्दों के अर्थ को जानना आवश्यक है:

  • आकाश-पातालो बांधूँ: दसों दिशाओं के साथ-साथ आकाश और पाताल (संपूर्ण ब्रह्मांड) को साधक के लिए सुरक्षित करना।

  • अष्टो दख्खा बांधु: आठों दिशाओं को कीलित करना ताकि कोई भी नकारात्मकता प्रवेश न कर सके।

  • आसोन-बासोन बांधूँ: अपने बैठने के स्थान (आसन) और आसपास के वस्त्र व संपूर्ण वातावरण को पवित्र और सुरक्षित करना।

  • मोहादेबेर बांधे: देवों के देव महादेव (भगवान शिव) की अमोघ शक्ति और मर्यादा से इस दिव्य बंधन को बांधना।

  • कामरु कामाक्ष्या मायेर आग्याय: तंत्र की अधिष्ठात्री देवी, मां कामरू कामाख्या की दिव्य आज्ञा से इस लोक-कल्याणकारी कार्य को संपन्न करना।

(नोट: वेबसाइट पर मुख्य महामंत्र का मूल पाठ दीक्षा के अनुसार या शुद्ध बंगाली टोन के साथ नीचे प्रस्तुत किया जाता है।)

🎯 पूर्ण प्रयोग एवं सिद्ध विधि (Step-by-Step Guide)

नए साधकों और आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले छात्रों के लिए इस विधि को अत्यंत सरल शब्दों में नीचे समझाया गया है:

1.पात्र का चयन:चरण १.

सबसे पहले एक स्वच्छ तांबे (Copper) या पीतल (Brass) के पात्र (कटोरी या लोटा) में शुद्ध गंगाजल या साफ जल लें।

2.मंत्र का जप:चरण २.

उस जल पात्र को अपने सम्मुख रखें। पूरी तरह एकाग्रचित्त होकर मूल बंगाली महामंत्र का ७ (7) बार स्पष्ट और शुद्ध उच्चारण के साथ जप करें।

3.जल को अभिमंत्रित करना:चरण ३.

प्रत्येक बार मंत्र पढ़ने के बाद पात्र के जल पर हल्की सी फूंक (सुरक्षा फूंक) मारें। ७ बार मंत्र पढ़ने और फूंक मारने से वह जल पूरी तरह अभिमंत्रित और सिद्ध हो जाता है।

4.स्थान का बंधन व छिड़काव:चरण ४.

अब इस अभिमंत्रित जल को अपने आसन के चारों ओर और अपने पूरे साधना कक्ष (पूजा घर या आश्रम) में छिड़क दें। जल छिड़कते ही वह संपूर्ण स्थान आध्यात्मिक रूप से कीलित हो जाता है।


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